पूरी हुई जांच, ग्रामीणों को अब न्याय का इंतजार, ग्राम पंचायत तमता में प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी की शिकायत का मामला, जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि होने की खबर

पूरी हुई जांच, ग्रामीणों को अब न्याय का इंतजार, ग्राम पंचायत तमता में प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी की शिकायत का मामला, जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि होने की खबर

तमता। ग्राम पंचायत तमता में प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी की पुष्टि होने की खबर सामने आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार जांच के दौरान जांच दल को कई गंभीर अनियमिताएं मिली हैं जिनसे जानबूझकर गड़बड़ी किए जाने की पुष्टि हुई है। जांच पूरी होने के बाद ग्रामीणों को अब न्याय का इंतजार है। 

उल्लेखनीय है कि हाल ही में ग्राम पंचायत तमता के ग्रामीणों ने एसडीएम पत्थलगांव से शिकायत कर प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी समेत कई योजनाओं में अनियमितता के आरोप लगाए थे। इसमें रोजगार सहायक और अन्य पंचायतकर्मियों को जिम्मेदार ठहराते हुए एसडीएम से मामले की जांच कराते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इस पूरे मामले को ‘‘जशपुर क्राॅनिकल‘‘ के द्वारा प्रमुखता से उठाया गया। जिसके बाद ग्रामीणों की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एसडीएम आर एस बिसेन के द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मामले की जांच कराने के निर्देश दिए गए थे। एसडीएम के निर्देश पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रियंका रानी गुप्ता के द्वारा मामले में जांच टीम का गठन किया गया था। जांच दल ने शिकायतकर्ताओं के बयान के साथ ही मौके पर पहुंचकर शिकायतों का भौतिक सत्यापन भी किया। ‘जशपुर क्राॅनिकल‘ को मिली जानकारी के अनुसार जांच में ग्रामीणों की कई शिकायतों की पुष्टि हुई है। खास तौर पर प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ी के कई गंभीर मामले जांच में सही पाए गए हैं। जानकारी के अनुसार जांच में जिन शिकायतों की पुष्टि होना पाया गया है उनमें एक हितग्राही के नाम पर स्वीकृत आवास की राशि अपने ससुर के खाते में अंतरित कराने, गांव का निवासी नहीं होने के बावजूद हितग्राही के नाम पर आवास स्वीकृत कराते हुए उसकी राशि का हेर - फेर करने और बिना निर्माण प्रारंभ हुए ही कई हितग्राहियों के खातों में तीनों किश्तों की राशि अंतरित करा देने के मामले शामिल हैं। यह भी बताया जाता है कि प्रधानमंत्री आवास के लिए जिओ टैगिंग में फर्जीवाड़ा करने की भी पुष्टि हुई है। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास में गड़बड़ियों को रोकने के लिए जिओ टैगिंग करना अनिवार्य होता है। इसके लिए निर्माणाधीन या निर्मित मकान की फोटो के साथ ही उनकी लोकेशन की भी पुष्टि करनी होती है। मकान की स्थिति के आधार पर ग्रामीणों के खाते में राशि अंतरित की जाती है। बताया जाता है कि जांच दल को कई ऐसे मकान मिले जिनमें निर्माण प्रारंभ भी नहीं हुआ है और हितग्राहियों के खाते में तीनों किश्तें जमा करा दी गईं जबकि ऐसा केवल मकान का निर्माण पूर्ण होने की स्थिति में किया जाता है। 

नहीं जमा हुआ प्रतिवेदन

ग्रामीणों की शिकायतों की जांच हालांकि दस दिन पहले ही पूरी हो चुकी है परंतु प्रतिवेदन अब तक जमा नहीं हो सका है। इसे लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच को पूरा हुए दस दिन से भी अधिक समय बीतने के बावजूद जांच प्रतिवेदन जमा नहीं होना गड़बड़ियों को लेकर विभाग की लापरवाही का परिचायक है। उनका कहना है कि जांच प्रतिवेदन से ही पंचायत में हुई गड़बड़ियां उच्चाधिकारियों के सामने आ सकेंगी और तब ही मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। उन्होंने जल्द ही जांच प्रतिवेदन जमा नहीं होने पर उच्चाधिकारियों से मुलाकात कर वस्तुस्थिति से अवगत कराने की बात कही है।