बस्तर जिले के तेंदूपत्ता संग्राहकों को 9 करोड़ 41 लाख 73 हजार का शत-प्रतिशत हुआ भुगतान
जगदलपुर। बस्तर जिले में इस वर्ष तेंदूपत्ता संग्राहकों को उनके संग्रहण का शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। जिले के 34,033 परिवारों को तेंदूपत्ता संग्रहण के बदले कुल 9 करोड़ 41 लाख 73 हजार रूपए की राशि ऑनलाइन माध्यम से क गई। 100 प्रतिशत डिजिटल भुगतान से न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि संग्राहकों का वन विभाग पर विश्वास भी मजबूत हुआ है।
मिली जानकारी के अनुसार जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण के लिए 15 समितियां कार्यरत है इनमें सबसे अधिक मारडूम की समिति ने तेंदूपत्ता संग्रहण किया वहीं छिंदगांव की समिति ने सबसे कम संग्रहण कर पाया। कम संग्रहण के कारण संग्राहकों की कुल आय में करीब ढाई करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई है। बस्तर जिले की सभी 15 समितियों में सबसे अधिक भुगतान मारडूम समिति को किया गया, जहाँ सबसे अधिक 1609 बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हुआ। यहां के संग्राहकों को कुल 88,48,922 रूपए वितरित हुए। वहीं सबसे कम भुगतान छिंदगांव समिति को हुआ, जहाँ मात्र 463 बोरा संग्रहण के बदले 25,47,446 रूपए का भुगतान किया गया।
सहायक वन संरक्षक गुलशन साहू ने बताया कि इस बार जिले को 21,800 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य मिला था, लेकिन प्रतिकूल मौसम के चलते लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया और केवल 17,122 मानक बोरा का ही संग्रहण हो सका। लक्ष्य पूरा हो जाने पर जिले में संग्राहकों को लगभग 11 करोड़ 99 लाख रूपए मिलते। लक्ष्य से कम संग्रहण होने के कारण लगभग 2 करोड़ 58 लाख रूपए की आय संग्राहकों को नहीं मिल पाई।
बस्तर जिले के उप वनमंडलाधिकारी देवलाल दुग्गा ने बताया कि इस वर्ष 2025 में मौसम की अनिश्चितता के असर से तेंदूपत्ता की पैदावार प्रभावित हुई, जिसके चलते संग्रहण लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। इसके बावजूद सभी संग्राहकों को समय पर और पूरी राशि का भुगतान डिजिटल माध्यम से किया जा चुका है।

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