मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का समुद्री व्यापार पटरी पर लौटा, जहाजों की आवाजाही सामान्य: केंद्रीय मंत्री सोनोवाल
मिडिल ईस्ट में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी वैश्विक चिंता के बीच भारत के समुद्री व्यापार को लेकर राहत की खबर है। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार के त्वरित कदमों से हालात अब तेजी से सामान्य हो रहे हैं और जहाजों की आवाजाही स्थिर हो गई है।
सरकार ने बनाए रखा कड़ा निगरानी तंत्र
सोनोवाल ने बताया कि मंत्रालय ने शुरुआत से ही सभी प्रमुख बंदरगाहों और हितधारकों के साथ करीबी समन्वय बनाए रखा। जहाजों की आवाजाही, कार्गो कंजेशन और पोर्ट संचालन पर नजर रखने के लिए रियल-टाइम रिव्यू मैकेनिज्म लागू किया गया।
पीएम के निर्देश पर उठाए गए कदम
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश थे कि आपूर्ति श्रृंखला पर न्यूनतम असर पड़े। इसके तहत बंदरगाहों को नवाचार आधारित संचालन, यार्ड क्षमता बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स को बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए।
90% बैकलॉग हुआ क्लियर
मंत्री ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण जो बैकलॉग बना था, उसका करीब 90% हिस्सा प्रमुख बंदरगाहों से साफ कर दिया गया है। इसे उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अब स्थिति काफी हद तक सामान्य हो चुकी है।
हितधारकों को वित्तीय राहत
सरकार ने निर्यातकों और आयातकों के हितों को ध्यान में रखते हुए पोर्ट अथॉरिटीज को ग्राउंड रेंट में छूट और रीफर चार्जेस में रियायत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही शिकायत निवारण प्रणाली को भी मजबूत किया गया है, ताकि समस्याओं का तुरंत समाधान हो सके।
मुनाफाखोरी पर सख्त रुख
सोनोवाल ने स्पष्ट किया कि संकट के समय मुनाफाखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए शिपिंग शुल्कों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरकार पूरी तरह सतर्क
उन्होंने कहा कि हालात में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सरकार सतर्क बनी हुई है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखी गई है।

Public reporter 



