दिन दहाड़े पक्की सड़कों पर घूम रहा हाथियों का दल, दहशत में बालाझर के ग्रामीण, विभाग के रवैये पर जताई नाराजगी, कहा खुद भगा रहे हाथियों को, विभाग का दावा स्थिति पर है नजर
तमता। ग्राम पंचायत बालाझर में एक बार फिर हाथियों का उत्पात शुरू हो गया है। लोग दहशत में हैं वहीं वन विभाग पुराने ढर्रे पर लोगों को समझाईश देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री करने में जुटा है। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि शनिवार और रविवार दो रातों से हाथी इलाके में डेरा डाले हुए है। परंतु विभाग क कर्मचारी सोमवार सुबह को मौके पर पहुंचे हैं। ऐसे में लोग खुद ही हाथियों को भगाने में जुटे हुए हैं। लोगों ने विभागीय कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत करने की बात कही है।

उल्लेखनीय है कि पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के आस - पास रहने वाले लोग पिछले कुछ समय से लगातार हाथियों का आतंक झेल रहे हैं। कभी हाथियों का दल क्षेत्र में घुस आता है तो कभी दंतैल हाथी के आतंक से लोग सहमे रहते हैं। कुछ दिनों पहले ही एक दंतैल हाथी पत्थलगांव शहर के प्रेमनगर मोहल्ले में घुस आया था। जिसने लोगों की सांसें अटका दी थीं। बाद में धीरे - धीरे वह वन की ओर चला गया। वहीं जशपुर और सरगुजा जिले का सीमांत क्षेत्र का बालाझर ग्राम पंचायत दशकों से हाथियों के आतंक से पीड़ित है। कहने को वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंच जाते हैं परंतु केवल लोगों को हाथियों के पास नहीं जाने की समझाईश देकर अपना कर्तव्य पूरा कर लेते है। बताया जा रहा है कि हाथियों का दल एक बार फिर ग्राम बालाझर के इलाके में आ पहुंचा है। यहां लोगों ने शोर मचाकर और ट्रैक्टर से आवाज कर उन्हें भगाने का प्रयास किया तो हाथी बंालाझर से सटे बंशीपुर की ओर चले गए हैं। उधर हाथियों की आमद के बाद से विभाग की कार्यशैली को लेकर लोगों में नाराजगी का माहौल है। लोगों का कहना है कि हाथी बार - बार इस इलाके में आ जाते हैं परंतु विभाग इस ओर अपेक्षाकृत ध्यान नहीं देता और लोगों को खुद अपनी जान हथेली पर रखकर अपनी सुरक्षा करनी पड़ती है। लोगों की मानें तो हाथियों का दल शनिवार की रात से बालाझर और आस-पास के जंगलों में डेरा डाले हुए है और विभाग के कर्मचारी सोमवार की सुबह यहां पहुंचे हैं, जबकि इसकी सूचना विभाग को तत्काल दे दी गई थी। कर्मचारिचों की गैर मौजूदगी में लोगों ने किसी प्रकार हाथियों को अपने इलाके से खदेड़ा। उधर विभाग का दावा इसके ठीक उलट है। वन परिक्षेत्राधिकारी कृपासिंधु पैंकरा का कहना है कि विभागीय कर्मचारी और हाथी मित्र दल मौके पर मौजूद हैं और हाथियों के वापस आने की संभावना को देखते हुए डटे हुए हैं।
दहशत में लोग
ग्राम पंचायत बालाझर में हाथियों के आने से ग्रामीण दहशत में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने किसी प्रकार हाथियों को बंशीपुर की ओर खदेड़ा है। परंतु खतरा अभी टला नहीं है। लोगों ने बताया कि बालाझर से बंशीपुर का इलाका महज आधा किमी की दूरी पर है और कभी भी हाथी वापस उनके इलाके में आ सकते हैं। ऐसे में रात तो रात दिन में भी लोगों को अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है। लोगों की मानें तो हाथी दिन में भी पक्की सड़कों पर, उनके अगल - बगल घूमते दिखाई दे जाते हैं जिससे उनका सड़़कों पर चलना भी मुश्किल हो गया है और सड़कों पर चलते समय कहीं से भी हाथियों के सामने आ धमकने की आशंका सताती रहती है। कहना है कि हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद विभाग की ओर से उन्हें अपेक्षित मदद नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि पहले हाथियों से सुरक्षा के लिए लोगों को संसाधन विभाग की ओर से मुहैया कराए जाते थे परंतु अब स्थिति बिल्कुल उलट गई है।
‘‘ हाथियों का दल वर्तमान में सीतापुर वन परिक्षेत्र की ओर चला गया है। परंतु उनके कभी भी क्षेत्र में वापस आ सकने की संभावना को देखते हुए वन अमला और हाथी मित्र दल मौके पर डटे हुए हैं। विभाग की स्थिति पर पूरी नजर है। ‘‘
कृपा सिंधु पैंकरा, वन परिक्षेत्राधिकारी, पत्थलगांव





