एक वर्ष से बकाया थी मजदूरी , मीडिया के दखल के बाद आनन - फानन में विभाग ने करा दिया भुगतान, मनरेगा की कार्यप्रणाली पर भुगतान के बाद उठे और गंभीर सवाल.... ,क्या एक गलती छिपाने के लिए कर दी दूसरी गलती ?
तमता। ग्राम पंचायत तमता में प्रधानमंत्री आवास के निर्माण में अनियमितता का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि रोजगार सहायक के द्वारा जिओ टैगिंग के नाम पर हितग्राहियों के खाते से मजदूरी की राशि काटी जा रही थी। 1 वर्ष बाद मीडिया के दखल के बाद रोजगार सहायक के द्वारा आनन - फानन में नगद मजदूरी हितग्राही को देने की बात भी सामने आई है। मामले के सामने आने से मनरेगा की गड़बड़ी एक बार फिर उजागर हो गई है।

मनरेगा के तहत मजदूरी के भुगतान में अनियमितता कोई नई बात नहीं है। नगद भुगतान में ग्राम पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा की जा रही गड़बड़ियों को देखते हुए ही केंद्र सरकार द्वारा मजदूरों के खातों में सीधे ही मजदूरी का भुगतान करने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई परंतु इसके बाद भी मजदूरी के भुगतान में गड़बड़ियां थमी नहीं हैं। मस्टर रोल में काम नहीं करने वाले मजदूरों के नाम भरकर उनसे सांठ-गांठ कर गड़बड़ियां की जाने लगी हैं। ताजा मामला विकासखंड के ग्राम पंचायत तमता का है। जहां रोजगार सहायक पर मजदूरी भुगतान में गड़बड़ी करने के आरोप लगे हैं। यहां के निवासी मधुसूदन यादव का कहना है कि उसके पिता के नाम पर स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास में मजदूरी भुगतान करते समय रोजगार सहायक ने 7 दिनों की कम मजदूरी का भुगतान किया है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी का भुगतान किया जाता है परंतु रोजगार सहायक के द्वारा केवल 83 दिनों की ही मजदूरी का भुगतान किया गया। उन्होंने बताया कि रोजगार सहायक का कहना है कि उसके द्वारा जिओ टैगिंग के लिए मेट रखा गया है जिसको हितग्राहियों की मजदूरी की राशि से भुगतान किया जाता है। इसके लिए ही उनके द्वारा 7 दिनों की मजदूरी का भुगतान कम किया गया है। मधुसूदन ने बताया कि उनके आवास का काम 2024 में ही पूरा हो चुका है। इसके बाद से उन्होंने बकाया मजदूरी के लिए कई बार रोजगार सहायक और ग्राम पंचायत से संपर्क किया परंतु रोजगार सहायक ने 7 दिनों की मजदूरी का भुगतान नहीं किया। थक - हार कर उन्होंने उच्चाधिकारियों से बकाया मजदूरी का भुगतान करने की गुहार लगाई और ग्राम सभा की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया, परंतु रोजगार सहायक टस से मस नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने इसे लेकर मीडिया से संपर्क साधा। मीडिया के मामले में दखल देते ही रोजगार सहायक आनन - फानन में शुक्रवार को मधुसूदन के पिता गोवर्धन यादव के पास पहुंची और बकाया 7 दिनों की मजदूरी का नगद भुगतान कर दिया। ‘जशपुर क्राॅनिकल‘ ने इसे लेकर मनरेगा की कार्यक्रम अधिकारी नीलम भगत से संपर्क किया तो उन्होंने उल्टा हितग्राही पर ही समय पर काम पूरा नहीं करने का आरोप मढ़ दिया। उनका कहना है कि हितग्राही द्वारा समय पर कार्य पूरा नहीं करने से शेष राशि का भुगतान नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि बकाया 7 दिनों की राशि का भुगतान हितग्राही को पंचायत के खाते से करा दिया गया है।
उठ रहे सवाल
मीडिया के दखल के बाद भले ही रोजगार सहायक के द्वारा हितग्राही को बकाया 7 दिनों की मजदूरी का भुगतान करा दिया गया हो परंतु इसने मनरेगा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई और सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि मनरेगा की कार्यक्रम अधिकारी नीलम भगत की मानें तो हितग्राही की गलती के कारण 7 दिनों की मजदूरी कालातीत हो चुकी थी ऐसे में वह मजदूरी भुगतान का पात्र नहीं रह गया था। तो फिर मजदूरी का भुगतान अपने आप ही विभाग की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला खड़ा करता है। लोगों का कहना है कि यदि हितग्राही बकाया मजदूरी हासिल करने का पात्र था तो उसे एक वर्ष तक क्यों लटकाकर रखा गया और पात्र होने पर उसे नियमों के अनुसार खाते मंे मजदूरी का भुगतान प्राप्त होना चाहिए था परंतु मनरेगा के नियमों को दरकिनार कर विभाग द्वारा नगद राशि का भुगतान अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर दूसरा सवालिया निशान है। वहीं कार्यक्रम अधिकारी नीलम भगत का यह कहना है कि हितग्राही को पंचायत से बकाया मजदूरी की राशि का भुगतान किया गया। जानकारों ने इसे लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मजदूरी भुगतान के लिए मनरेगा ने पंचायत के किस मद की राशि का इस्तेमाल किया गया और क्या इसके लिए विधिवत् प्रक्रिया का पालन किया गया। या क्या मनरेगा के कार्यों के लिए पंचायत के किसी अन्य मद की राशि का इस प्रकार इस्तेमाल किया जा सकता है। दूसरी ओर ग्राम सरपंच ने पंचायत की राशि का इस्तेमाल किए जाने की बात से ही इंकार किया है। ऐसे में ग्राम सरपंच और कार्यक्रम अधिकारी के दावों में भिन्नता को देखते हुए लोगों ने अनियमितता की जांच कराए जाने की मांग की है।
ग्राम सरपंच ने किया इंकार
कार्यक्रम अधिकारी नीलम भगत के पंचायत के खाते से बकाया मजदूरी का भुगतान करने के दावे पर ‘जशपुर क्राॅनिकल‘ ने सरपंच सीता बाज से संपर्क किया। उन्होंने पंचायत के खाते से बकाया मजदूरी का भुगतान किए जाने की जानकारी से ही इंकार कर दिया। उनका कहना है कि पंचायत के खाते से किसी भी राशि का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना नहीं किया जा सकता है और उन्हें इस प्रकार किसी भी बकाया मजदूरी का भुगतान किए जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने रोजगार सहायक पर उन्होंने कोई भी जानकारी नहीं देने का भी आरोप लगाया। सरपंच ने बताया कि चुनाव के बाद से ही उन्होंने कई बार रोजगार सहायक को प्रधानमंत्री आवास हासिल करने वाले लोगो, मजदूरों के जाॅब कार्ड , खाते और मजदूरी भुगतान की राशि के बारे में कई बार जानकारी मांगी है। परंतु बार - बार कहने के बाद भी रोजगार सहायक के द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि रोजगार सहायक केवल मस्टर रोल पर ही उनके दस्तखत लेने आती है और वो भी बस छूटते समय।
‘‘प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 90 दिनों की मजदूरी का भुगतान कराया जाता है परंतु कई बार हितग्राही समय पर कार्य पूर्ण नहीं करते हैं जिससे मजदूरी की राशि लैप्स भी हो जाती है। इस मामले में समय पर आवास का कार्य पूर्ण नहीं हुआ था और पूर्ण होने की जिओ टैगिंग हो जाने के कारण सीसी लग चुका था। इसलिए शेष भुगतान होना संभव ही नहीं था। हितग्राही को पंचायत से शुक्रवार को ही 7 दिनों की मजदूरी का भुगतान करा दिया गया है।‘‘
नीलम भगत, कार्यक्रम अधिकरी, मनरेगा पत्थलगांव
‘‘एक वर्ष पुराना मामला है और भुगतान तभी हो जाना चाहिए था। मैंने अंतरण की विस्तृत जानकारी मंगाई है। सोमवार को जानकारी देख कर ही कुछ बता पाउंगी।‘‘
प्रियंका रानी गुप्ता, सीईओ, जनपद पंचायत, पत्थलगांव






